निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित दिए, गए प्रश्नों के उत्तर हल सहित |
गद्यांश - 1
रमणीयता और नित्य नतनता अन्योन्याश्रित है, रमणीयता के अभाव में कोई भी चीज मान्य नहीं होती। नित्य नूतनता किसी भी सर्जक की मौलिक उपलब्धि की प्रामाणिकता सूचित करती है और उसकी अनुपस्थिति में कोई भी चीज वस्तुतः जनता व समाज के द्वारा स्वीकार्य नहीं होती। सड़ी-गली मान्यताओं से जकड़ा हुआ समाज जैसे आगे बढ़ नहीं पाता, वैसे ही पुरानी रीतियों और शैलियों की परम्परागत लीक पर चलने वाली भाषा, भी जन-चेतना को गति देने में प्राय: असमर्थ ही रह जाती है। भाषा समूची युग-चेतना की अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है और ऐसी सशक्तता तभी वह अर्जित कर सकती है जब वह अपने गुगानुकूल सही मुहावरों को ग्रहण कर सके। भाषा सामाजिक भाव- प्रकटीकरण की सुबोधता के लिए ही उद्दिष्ट है, उसके अतिरिक्त उसकी जरूरत ही सोची नहीं जाती।
(क) सर्जक की मौलिक उपलब्धि का प्रमाण क्या है?
उत्तर- (क) नित्य नूतनता ही सर्जक की मौलिक उपलब्धि का प्रमाण है।
(ख)किससे जकड़ा हुआ समाज आगे बढ़ नहीं पाता !
उत्तर – (ख) सड़ी गली प्राचीन मान्यताओं से जुड़ा एवं उनमें जकड़ा हुआ कोई भी समाज आगे नहीं बढ़ पाता है।
(ग) नित्य नूतनता क्या सूचित करती है?
उत्तर – (ग) नित्य नूतनता किमी भी सर्जक की मौलिक उपलब्धि की प्रामाणिकता सूचित करती है।
(घ) युग-चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति का साधन क्या है?
उत्तर – (घ) युग-चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति का साधन भाषा है।
(ङ) ‘अन्योन्याश्रित’ और ‘परम्परागत’ शब्दों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – (ङ) ‘अन्योन्याश्रित’ का अर्थ है किसी दूसरे पर निर्भर होना तथा ‘परम्परागत’ का अर्थ है पुराने समय से चला आ रहा।
(च) ‘रमणीयता’ और ‘उद्दिष्ट’ शब्दों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – (च) ‘रमणीयता’ का अर्थ है सामान्यतः सुन्दरता अथवा मनोरमता तथा ‘उद्दिष्ट’ का अर्थ है उद्देश्य करके अथवा लक्ष्य करके। मान्य नहीं होती
(छ) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – (छ) रेखांकित अंशों की व्याख्या- (i) रमणीयता और नित्य भाषा में नवीनता उसके सौन्दर्य एवं आकर्षण के कारण होती है। सुन्दरता एवं नवीनता का परस्पर अनन्य सम्बन्ध है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, वे एक-दूसरे पर आश्रित हैं।
(ii) भाषा समूची युग-चेतना ………………………………….को ग्रहण कर सके-
भाषा को समस्त यग चेतना को प्रकट करने का एक शक्ति सम्पन्न माध्यम कहा गया है। भाषा मे ऐसी सशक्ता एवं जीवन्तता तभी आ सकती है. जब युग के अनुसार उचित महावरों को ग्रहण करने की उसमें शक्ति हो ।
(ज) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर – (ज) प्रस्तुत गद्यांश ‘भाषा और आधुनिकता’ पाठ से लिया गया है जिसके लेखक प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी हैं
गद्यांश - 2
भाषा की साधारण इकाई शब्द है, शब्द के अभाव में भाषा का अस्तित्व ही दुरूह है। यदि भाषा में विकसनशीलता शुरू होती है तो शब्दों के स्तर पर ही । दैनंदिन सामाजिक व्यवहारों में हम कई ऐसे नवीन शब्दों का इस्तेमाल करते जो अंग्रेजी, अरबी, फारसी आदि विदेशी भाषाओं से उधार लिये गये हैं। वैसे ही नये शब्दों का गठन भी अनजाने में अनायास ही होता है। ये शब्द अर्थात् उन विदेशी भाषाओं से सोधे अधिकृत ढंग से उधार लिये गये शब्द, भले ही कामचलाऊ माध्यम से प्रयुक्त हों, साहित्यिक- दायरे में कदापि ग्रहणीय नहीं। यदि ग्रहण करना तो उन्हें भाषा की मूल प्रकृति के अनुरूप साहित्यिक शुद्धता प्रदान करनी पड़ती है।
(क) भाषा की विकासशीलता कैसे शुरू होती है?
उत्तर-(क) भाषा का विकास शब्दों से ही होता है, शब्द-प्रयोग ही भाषा को विकसित करता है।
(ख) ‘अविकृत ढंग’ और ‘मूल प्रकृति का क्या आशय है?
उत्तर-(ख) विदेशी भाषाओं से सीधे उधार लिए गये शब्द कामचलाऊ होते हैं, वे भाषा का प्रामाणिक अथवा साहित्यिक रूप नहीं होते हैं। विदेशी शब्द साहित्यिक परिधि में नहीं आते हैं, वे तो कामचलाऊ होते हैं। यदि उन्हें ग्रहण किया जाता है तो भाषा के मूल स्वभाव के अनुरूप साहित्यिक रूप से शुद्धता देनी पड़ती है। यही इन दोनों शब्दों का आशय है।
(ग) साहित्यिक दायरे में विदेशी भाषा के शब्दों को किस रूप में ग्रहण करना पड़ता है
उत्तर-(ग) साहित्यिक दायरे में विदेशी भाषायी शब्दों को जैसे का तैसा कामचलाऊ माध्यम हेतु प्रयुक्त करते हैं।
(घ) किसके अभाव में भाषा का अस्तित्व की दुरूह है?
उत्तर-(घ) शब्द के अभाव में भाषा का अस्तित्व ही दुरूह है।
(ङ) नये शब्दों का गठन कैसे होता है?
उत्तर-(ङ) नये शब्दों का गठन भी अनजाने में अनायास ही होता है।
(च) किन विदेशी भाषाओं से शब्द लेकर हम नये शब्दों का इस्तेमाल करते हैं?
उत्तर-(च) अंग्रेजी, अरबी, फारसी आदि विदेशी भाषाओं से शब्द लेकर हम नये शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।
(छ) भाषा की साधारण इकाई क्या है
उत्तर-(छ) भाषा की साधारण इकाई शब्द है।
(ज) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-(ज) रेखांकित अंश की व्याख्या– भाषा में शब्द के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए लेखक कहता है कि शब्द किसी भी भाषा की मूलभूत इकाई है। इसके अभाव में भाषा का अस्तित्व ही असम्भव है।
(झ) गद्यांश का शीर्षक एवं लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर-(झ) उपर्युक्त गद्यांश ‘भाषा और आधुनिकता’ पाठ से लिया गया है जिसके लेखक प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी हैं।
गद्यांश - 3
भाषा स्वयं संस्कृति का एक अटूट अंग है। संस्कृति परम्परा से निःसृत होने पर भी, परिवर्तनशील और गतिशील उसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है। वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उदभूत नई सांस्कतिक नचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परम्परागत प्रयोग पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए नये प्रयोगों की, नई भाव-योजनाओं को व्यक्त करने के लिए नये शब्दों की खोज की महती आवश्यकता है।
(क) संस्कृति की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए
उत्तर-(क) भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ है कि वह परम्परा निःसत होने पर भी गतिशील रहती है, परिवर्तनशील रहती उसकी गति को विज्ञान की उन्नति से भी जोड़ा जा सकता है।
(ख) नये शब्दों की दोज की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर-(ख) नवीन भात योजनाओं को प्रकट करने के लिए नवीन शब्द की खोज की आवश्यकता पड़ती है।
(ग) भाषा किसका अटूट अंग है?
उत्तर-(ग) भाषा संस्कृति का एक अटूट अंग है।
(घ) किसकी गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है?
उत्तर-(घ) संस्कृति की गति विज्ञान की प्रगति के साथ जोड़ी जाती है।
(ड) सांस्कृतिक हलचलें किसके लिए पर्याप्त नहीं है?
उत्तर-(ड)वैज्ञानिक आविष्कारों के प्रभाव के कारण उद्भूत नई सांस्कृतिक हलचलों को शाब्दिक रूप देने के लिए भाषा के परम्परागत प्रयोग पर्याप्त नहीं हैं।
(च) ‘उद्भूत’ और ‘परम्परागत’ का अर्थ लिखिए।
उत्तर-(च) ‘उदभूत’ का अर्थ है बाहर आया हुआ, प्रकटित तथा ‘परम्परागत’ परम्पराओं से आये
हुए को कहा जाता है।
(छ) रेखांकित अंशों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-(छ) रेखांकित अंशों की व्याख्या- (i) भाषा स्वयं संस्कृति का एक अटूट अंग है— लेखक के अनुसार भाषा संस्कृति का अभिन्न अंग है क्योंकि संस्कृति की अभिव्यक्ति का माध्यम भाषा ही है। इस प्रकार हर देश की भाषा का उस देश की संस्कृति से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है।
(ii) वैज्ञानिक आविष्कारों…………………………………पर्याप्त नहीं हैं-
हमारे वैज्ञानिक जब शोध करते हैं तब शोधों से उत्पन्न नवीन सांस्कृतिक हलचलें होती हैं उन्हें शब्द रूप प्रदान करने हेतु भा का परम्परागत पयोग कम पड़ जाता है वह शब्दावली शोध प्रकट करने में नाकामी होती है तब नवीन शब्द खोजने की जरूरत होती है।
(ज) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ का शीर्षक और उसके लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर-(ज) प्रस्तुत गद्यांश ‘भाषा और आधुनिकता’ पाठ से लिया गया है जिसके लेखक प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी हैं।
गद्यांश - 4
यदि यह नवीनीकरण सिर्फ कुछ पण्डितों की व आचार्यों की दिमागी कसरत ही बनी रहे तो भाषा गतिशील नहीं होती। भाषा का सीधा सम्बन्ध प्रयोग से है और जनता से है। यदि नये शब्द अपने उद्गम स्थान में ही अड़े रहें और कहीं भी उनका प्रयोग किया नहीं जाये तो उसके पीछे से उद्देश्य पर ही कुठाराघात होगी।
(क) भाषा का सीधा सम्बन्ध किससे है?
उत्तर-(क) भाषा का सीधा सम्बन्ध जनता द्वारा उसके किये जाने वाले प्रयोग से होता है।
(ख) नये शब्दों के प्रयोग न किये जाने पर क्या परिणाम होगा?
उत्तर-(ख) नवीन शब्दों के प्रयोग न करने का तात्पर्य उन्हें जड़ बनाना है, उनका मूलोच्छेदन करना है अतः नवीन शब्दों का प्रयोग अति आवश्यक है जिससे वे एक ही स्थान पर अड़े न रहें, उनका बार-बार प्रयोग होता रहे।
(ग) ‘कुठाराघात’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-(ग) ‘कुठाराघात’ का आशय है-कुठार से प्रहार करना या काटना जैसे शब्द का प्रयोग न करना उसकी जड़ कुठार से काटना।
(घ) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-(घ) रेखांकित अंश की व्याख्या – भाषा का सम्बन्ध उसके समुचित प्रयोग से है तथा जनता से है जिसके लिए भाषा का निर्माण हुआ है। भाषा के प्रयोग से ही जनता अपने भावों का आदान-प्रदान करती है।
(ङ) पाठ का शीर्षक तथा लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर-(ङ) उपर्युक्त गद्यांश ‘भाषा और आधुनिकता’ पाठ से लिया गया है जिसके लेखक प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी हैं।
गद्यांश - 5
भाषा का सीधा सम्बन्ध प्रयोग से है और जनता से है। यदि नये शब्द अपने उद्गम स्थान में ही अड़े रहें और कहीं भी उनका प्रयोग किया नहीं जाये तो उसके पीछे से उद्देश्य पर ही कुठाराघात होगा। इसके लिए यूरोपीय देशों में प्रेषण के कई माध्यम हैं, श्रव्य दृश्य विधान, वैज्ञानिक कथा साहित्य आदि। हमारी भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक कथा-साहित्य आदि। हमारी भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक कथा-साहित्य प्रायः नहीं के बराबर है। किसी भी नये विधान की सफलता अन्ततः जनता की सम्मति व असम्मति के आधार पर निर्भर करती है और जनता में इस चेतना को उजागर करने का उत्तरदायित्व शिक्षित समुदाय एवं सरकार का होना चाहिए।
(क)भाषा का सीधा सम्बन्ध किससे है?
उत्तर-(क) भाषा का सीधा सम्बन्ध जनता द्वारा उसके किये जाने वाले प्रयोग से होता है।
(ख)यूरोपीय देशों में शब्द-प्रेषण के माध्यम कौन-कौन से हैं?
उत्तर-(ख)यूरोपीय देशों में शब्द-प्रेषण के माध्यम दृश्य-श्रव्य विधान, वैज्ञानिक कथा साहित्य आदि हैं।
(ग) ‘कुठाराघात’ और ‘प्रेषण’ का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-(ग) ‘कुठाराघात’ का आशय है-कुठार से प्रहार करना या काटना जैसे शब्द का प्रयोग न करना उसकी जड़ कुठार से काटना तथा ‘प्रेषण’ का अर्थ है-सम्प्रेषण, भेजना, प्रयोग आदि।
(घ) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए
उत्तर-(घ) रेखांकित अंश की व्याख्या- कोई भी नया विधान अन्ततः जनता की सहमति अथवा असहमति पर निर्भर करता है। जनता में यह चेतना पैदा करना सरकार एवं शिक्षित लोगों पर निर्भर होना चाहिए।
(ङ) पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए।
उत्तर-(ङ) उपर्युक्त गद्यांश ‘भाषा और आधुनिकता’ पाठ से लिया गया है जिसके लेखक प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी हैं।
गद्यांश - 6
नए शब्द, नए मुहावरे एवं नई रीतियों के प्रयोगों से युक्त भाषा .को व्यावहारिकता प्रदान करना ही भाषा में आधुनिकता लाना है। दूसरे शब्दों में केवल आधुनिक युगीन विचारधाराओं के अनुरूप नए शब्दों के गढ़नेमात्र से ही भाषा का विकास नहीं होता, वरन् नए पारिभाषिक शब्दों को एवं नूतन शैली-प्रणालियों को व्यवहार में लाना ही भाषा को आधुनिकता प्रदान करना है। क्योंकि व्यावहारिकता ही भाषा का प्राणतत्त्व है।
(क) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
उत्तर-(क) प्रस्तुत गद्यांश प्रसिद्ध समालोचक और निबन्धकार प्रो० जी० सुन्दर रेड्डी द्वारा लिखित ‘भाषा और आधुनिकता’ नामक निबन्ध से उद्धृत है यह निबन्ध हमारी हिन्दी की पाठ्यपुस्तक के गद्य भाग में संकलित है।
(ख) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-(ख) भाषा में आधुनिकता लाने के लिए यह आवश्यक है कि नवीन शब्दों, नवीन मुहावरों एवं नवीन रीतियों के आधार पर भाषा को व्यावहारिक बनाने के प्रयास किए जाएँ । आधुनिक युग की विचारधाराओं के अनुरूप अनेक व्यक्ति नवीन शब्दों का प्रयोग करना ही भाषा के विकास की दृष्टि से पर्याप्त मानते हैं, परन्तु इस प्रकार की धारणा उचित नहीं है। केवल नवीन शब्द गढ़कर ही भाषा को आधुनिक नहीं बनाया जा सकता,
(ग) भाषा को व्यावहारिक बनाकर हम उसमें क्या परिवर्तन ला सकते हैं?
उत्तर-(ग) भाषा को व्यावहारिक बनाकर हम उसे आधुनिक बना सकते हैं।
(घ) भाषा का विकास कब नहीं होता?
उत्तर-(घ) आधुनिक विचारधाराओं के अनुरूप अनेक व्यक्ति नवीन शब्दों का प्रयोग करना ही भाषा के विकास की दृष्टि से पर्याप्त मानते हैं, परन्तु इस प्रकार की धारणा उचित नहीं है। इस प्रकार से भाषा का विकास नहीं होता।
(ङ) भाषा को आधुनिकता प्रदान करने हेतु क्या आवश्यक है?
उत्तर-(ङ) भाषा को आधुनिकता प्रदान करने हेतु यह आवश्यक है कि हम नवीन पारिभाषिक शब्दों एवं नवीन लेखन – शैलियों पर आधारित लेखन-पद्धतियों का प्रयोग करें।
(च) भाषा का प्राणतत्त्व क्या है?
उत्तर-(च) भाषा की व्यावहारिकता ही उसका प्राणतत्त्व होती है। जो भाषा हगी व्यावहारिकता को त्याग देती है, उसका शीघ्र ही अन्त हो जाता है।
