विद्यार्थी या छात्र जीवन में अनुशासन का महत्त्व

रूपरेखा – 1. प्रस्तावना, 2. विद्यार्थी का जीवन, 3. अनुशासन का महत्त्व, 4. विद्यार्थी जीवन और अनुशासन का सम्बन्ध, 5. उपसंहार ।

प्रस्तावना (शुरुआत)

आज का विद्यार्थी ही कल का नौजवान बनेगा। उसे ही आगे चलकर अपने समाज और देश को आगे बढ़ाना है। विद्यार्थी ही देश का भविष्य बनाने वाले और उसकी उम्मीद हैं। जीवन का यह समय बहुत कीमती होता है। इस उम्र में विद्यार्थी जो कुछ भी सीखता है, वही आदतें आगे चलकर उसके स्वभाव में शामिल हो जाती हैं। इसलिए इस उम्र में विद्यार्थियों का पूरी तरह अनुशासन (डििसिप्लिन) में रहना और अपने भविष्य की तैयारी करना बहुत ज़रूरी है। अगर इस उम्र में अनुशासन नहीं होगा, तो छात्रों के भटकने का पूरा डर रहता है। छात्रों के बिगड़ने का सीधा मतलब है देश का बिगड़ना। आज ज़रूरत इस बात की है कि हमारे छात्र सेहतमंद, समझदार, अच्छे चरित्र वाले और आगे की सोचने वाले बनें। 

विद्यार्थी का जीवन

विद्यार्थी जीवन खुद को बनाने का समय होता है। यह जीवन रूपी इमारत की सबसे मजबूत नींव है। इस समय छात्र को हर किसी से अच्छी बातें सीखनी चाहिए। जीवन का यह दौर सबसे अच्छा माना जाता है। भविष्य में देश को संभालने और समाज को सुधारने की ज़िम्मेदारी इन्हीं विद्यार्थियों पर है। इसलिए आज का विद्यार्थी जितना अच्छे व्यवहार वाला, सदाचारी और शरीर से मजबूत होगा, हमारा देश भविष्य में उतना ही सुखी और समृद्ध होगा। छात्र जीवन में ही दिमाग, मन और शरीर का पूरी तरह विकास करके अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहिए। 

अनुशासन का महत्त्व (Discipline की अहमियत)

नियमों और बड़ों की बातों को मानकर चलना ही अनुशासन कहलाता है। यह शासन चाहे माता-पिता का हो, शिक्षकों का हो, समाज का हो, सरकार का हो या फिर धर्म का हो—इनके नियमों में रहना ही हम सबके लिए फायदेमंद है। इन सबसे भी बढ़कर होता है ‘आत्म-अनुशासन’ यानी खुद पर काबू रखना। जो इंसान अपने मन को नियंत्रण में रखता है, वह कभी गलत रास्ते पर नहीं जा सकता। अनुशासन न होने से लोग अपनी मनमर्जी करने लगते हैं, जिससे तरक्की के रास्ते बंद हो जाते हैं। अनुशासन से ही जिंदगी व्यवस्थित होती है, मन काबू में रहता है और पढ़ाई या काम में ध्यान (एकाग्रता) लगता है।

विद्यार्थी जीवन और अनुशासन का सम्बन्ध

अनुशासन जीवन के हर मोड़ पर और हर समय ज़रूरी है, लेकिन छात्र जीवन में इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है। जिस स्कूल या कॉलेज के छात्रों में अनुशासन नहीं होता, वहाँ के शिक्षकों का पूरा समय बच्चों को शांत कराने, ठीक से बिठाने और उनके झगड़े सुलझाने में ही निकल जाता है। ऐसे माहौल में न तो शिक्षक पढ़ा पाते हैं और न ही छात्र पढ़ पाते हैं। यह बहुत चिंता की बात है कि आजकल हर तरफ विद्यार्थियों में अनुशासन की कमी देखने और सुनने को मिलती है। हमारे देश में दूसरी समस्याओं की तरह यह अनुशासनहीनता भी एक बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है।

उपसंहार (नतीजा)

जिस देश के लोग जितने ज़्यादा अनुशासित होते हैं, वह देश उतना ही महान बनता है। दुख की बात यह है कि आज हमारे देश के छात्रों और नौजवानों में अनुशासन की भावना कम होती जा रही है। इसी वजह से देश की तरक्की में रुकावटें आ रही हैं। आज के विद्यार्थी ही कल देश का भविष्य बनाएंगे। अगर वे आज नियमों का पालन करना नहीं सीखेंगे, तो भविष्य में देश को अच्छे से चला भी नहीं पाएंगे। अनुशासन के बिना जीवन की नाव बीच मझधार में ही फंस जाएगी। इसलिए हर छात्र को विद्यार्थी जीवन से ही हमेशा अनुशासन में रहने की आदत डालनी चाहिए।