रूपरेखा – 1. प्रस्तावना, 2. राष्ट्रीयता, 3. भावात्मक एकता, 4. राष्ट्रीयता की आवश्यकता, 5. उपसंहार
प्रस्तावना
भारत एक बहुत बड़ा देश है। यह उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक और पूर्व में नागालैंड से लेकर पश्चिम में गुजरात तक फैला हुआ है। भारत माता का यह विशाल और सुंदर रूप हम सबके देखने और पूजने योग्य है। यहाँ रहने वाले लोगों के रहन-सहन और बोलियों में बहुत अंतर है। इसके बाद भी, हम सब अंदर से एक हैं। यही अपनेपन की भावना हम सबको आपस में जोड़े रखती है। इसी भावना से हमारे अंदर देशभक्ति और राष्ट्रीयता का जन्म होता है।
राष्ट्रीयता
राष्ट्रीयता वह सच्ची भावना है जो देश के लोगों में देशप्रेम और गर्व पैदा करती है। जब यह पवित्र भावना जागती है, तब लोग अपने देश के लिए हँसते-हँसते अपनी जान भी दे देते हैं। इसी भावना की वजह से देश का हर नागरिक एक-दूसरे को अपना भाई मानता है। हम सब एक-दूसरे की मदद करना अपना सबसे बड़ा फर्ज समझते हैं। राष्ट्रीयता ही हमारे दिलों में देश को माँ का दर्जा देती है। भारत की धरती हमारी माता है। इसी धरती का अन्न-जल खाकर हम बड़े होते हैं। इसकी ताजी हवा में हम सांस लेते हैं। इसलिए देश की रक्षा करना हमारा सबसे बड़ा धर्म है। अपने देश को हमेशा एक रखने और उसकी रक्षा करने की ताकत हमें इसी राष्ट्रीयता से मिलती है।
भावात्मक एकता
हमारी राष्ट्रीयता की सबसे बड़ी ताकत हमारी भावात्मक एकता है। हमारे इतने बड़े देश में अलग-अलग भाषाएँ, पहनावा, रहन-सहन और खान-पान हैं। यहाँ कई धर्म और जातियाँ हैं, फिर भी हम सब एक हैं। हमारी इस एकता का कारण दिलों का जुड़ाव और हमारी संस्कृति है। हम हर इंसान में एकता देखते हैं और यही हमारे जीने का तरीका है।
राष्ट्रीयता की आवश्यकता
देश को एक रखने, सुरक्षित रखने और मजबूत बनाए रखने के लिए राष्ट्रीयता की भावना बहुत जरूरी है। इसी भावना के कारण लोग अपने देश के सम्मान और भले के बारे में सोचते हैं। हमारे नेताओं और सरकार को चाहिए कि वे अपने लालच और कुर्सी के मोह को छोड़ दें। उन्हें राजनीति के फायदे के लिए देश को खतरे में नहीं डालना चाहिए। मंत्रियों को अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर देश की भलाई के लिए सोचना होगा, नहीं तो देश का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा।
उपसंहार
आज सबसे बड़ी जरूरत यह है कि हम सब राष्ट्रीयता के सही मतलब को समझें। हमें सिर्फ अपने बारे में नहीं, बल्कि पूरे देश के भले के बारे में सोचना होगा। अगर देश सुरक्षित है, तभी हम सुरक्षित हैं। देश की तरक्की में ही हमारी तरक्की है। देश का विकास चाहने वाले हर नागरिक का यह फर्ज है कि वह जाति-पाति के भेदभाव को छोड़े। हमें आपस के झगड़ों में अपनी ताकत बर्बाद नहीं करनी चाहिए, बल्कि देश को आगे बढ़ाने में लग जाना चाहिए।
