महँगाई : समस्या और समाधान (महँगाई क्यों बढ़ रही है? जानिए इसके मुख्य कारण )

रूपरेखा–1. प्रस्तावना, 2. महँगाई के कारण, 3. महँगाई से उत्पन्न कठिनाइयाँ, 4. महँगाई रोकने के उपाय, 5. उपसंहार।

प्रस्तावना – भारत में कम कमाई होने के कारण आम लोगों के लिए अपने परिवार का पालन-पोषण करना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। कल तक एक व्यक्ति अपनी बंधी-बंधाई तनख्वाह में जो सामान और सुविधाएँ आसानी से खरीद लेता था, आज वह उन्हें जुटाने में भी लाचार महसूस करता है। इसका सबसे बड़ा कारण है आसमान छूती कीमतें और लगातार बढ़ती हुई महँगाई।आज हमें जिस महँगाई पर हैरानी हो रही है, अगर यह इसी रफ्तार से बढ़ती रही, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमारी बातों पर यकीन भी नहीं कर पाएँगी। सरकारी आंकड़ों से भी पता चलता है कि महँगाई हर छह महीने में इतनी बढ़ जाती है कि सरकार को अपने कर्मचारियों का खर्च चलाने के लिए बार-बार महँगाई भत्ता (DA) बढ़ाना पड़ता है। महँगाई की इस गंभीर समस्या को देखते हुए अब इसे दूर करने के उपायों पर सोचना बहुत जरूरी हो गया है।

महँगाई के कारण – महँगाई का सबसे बड़ा कारण लगातार बढ़ती आबादी (जनसंख्या विस्फोट) है। हर सेकंड बढ़ती जनसंख्या आज एक बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है। इतनी बड़ी आबादी का पेट भरने के लिए जरूरत के सामानों का उत्पादन (Production) नहीं हो पा रहा है। घर और फैक्ट्रियां बनाने के लिए खेती की जमीन और जंगल लगातार घटते जा रहे हैं। यही वजह है कि खेती की नई तकनीकों के बाद भी सबको पूरा सामान पहुँचाना मुश्किल हो रहा है। बढ़ती आबादी के कारण सिर्फ खाने-पीने की चीजें ही कम नहीं हो रही हैं, बल्कि आने वाले समय में पीने का साफ पानी और सांस लेने के लिए शुद्ध हवा कम होने का डर भी पैदा हो गया है।

महँगाई की दूसरी बड़ी वजह है दुकानदारों द्वारा सामान छिपाकर रखना (जमाखोरी) और बहुत ज्यादा फायदा कमाना (मुनाफाखोरी)। कुछ व्यापारी कम दाम में सामान खरीदकर अपने गोदामों में छुपा लेते हैं। इससे बाजार में अचानक सामान की कमी दिखने लगती है। जब सामान की कमी के कारण कीमतें आसमान छूने लगती हैं, तब वे उसे ऊँचे दामों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। इस गलत आदत की वजह से आम जनता को अपनी जरूरत का सामान खरीदने में बहुत परेशानी होती है। सरकारी प्रशासन की ढिलाई और ग्राहकों की सुरक्षा के मजबूत नियम न होने के कारण यह समस्या दिन-ब-दिन और भयानक होती जा रही है।

महँगाई से उत्पन्न कठिनाइयाँ- बाजार में निरन्तर बढ़ती हुई महँगाई से उत्पन्न कठिनाई का सामना केवल सामान्य नागरिक को ही नहीं करना पड़ता, इसका प्रभाव सरकार की वित्त व्यवस्था और योजनाओं पर भी पड़ता है। नागरिकों की समस्या यह होती है कि उन्हें अपने खर्चों में कमी करनी पड़ती है, जो प्राय: खान-पान के खर्चों में ही होती है या उपभोक्ता ऋण के बोझ से दबता जाता है। सरकार के सामने अपनी अर्थव्यवस्था और योजनाओं को सुचारु रूप से चलाने की होती है। सरकार अपनी अर्थव्यवस्था के लिए पूर्वानुमान लगाती है परन्तु वह पूर्वानुमान महँगाई के चलते हर बार गलत सिद्ध होता है। सरकार को अपने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते और बढ़े हुए वेतन की व्यवस्था करनी पड़ती है। चालू योजनाओं पर भी खर्च की मात्रा बढ़ जाती है। सरकार अपनी योजनाओं के लिए खर्च की व्यवस्था नहीं कर पाती और सारा राजस्व (सरकारी आय) गैर-योजना खर्चों पर व्यय करने को विवश होती है। इस प्रकार अनियन्त्रित महँगाई से देश का विकास भी अवरुद्ध हो जाता है।

महँगाई रोकने के उपाय – महँगाई के विकट और जटिल जाल से निकलना यद्यपि सरल नहीं है परन्तु फिर भी कुछ न कुछ उपाय तो हमें वस्तुओं का (कृषि एवं औद्योगिक) उत्पादन बढ़ाने का प्रयास करना है। जब बाजार उपभोक्ता वस्तुओं से भरे रहेंगे तो महँगाई पर अपने आप नियन्त्रण हो जायेगा । जनसंख्या नियन्त्रण भी महँगाई रोकने का एक उपाय है। उपभोक्ताओं की संख्या घटने से माँग घटेगी और माँग के घटने से मूल्य अपने आप घटेगा। उपभोक्त संरक्षण के कठोर उपाय करके जमाखोरों और मुनाफाखोरों की मनमानी रोकी जा सकती है। इस प्रकार मूल्यवृद्धि रोकने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के उपाय करने आवश्यक हैं।

उपसंहार — कुछ अर्थशास्त्रियों (Economists) का मानना है कि महँगाई का सीधा संबंध देश के विकास से होता है। उनके अनुसार, आगे बढ़ते हुए किसी भी देश में चीजों के दाम बढ़ना आम बात है। लेकिन यह विकास तभी माना जाएगा जब लोगों की कमाई भी उसी रफ्तार से बढ़े। अगर नागरिकों की आमदनी न बढ़े और सिर्फ सामानों के दाम बढ़ते जाएँ, तो यह देश के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होता है।दुर्भाग्य से, हमारे देश में लोगों की कमाई के मुकाबले महँगाई बहुत तेजी से बढ़ रही है। इसलिए इसे रोकना हम सभी की जिम्मेदारी है। सरकार भी इस मामले में चुपचाप हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकती। सरकार को ऐसी योजनाएँ और कड़े नियम बनाने होंगे, जिससे महँगाई के इस राक्षस को काबू में किया जा सके।