विज्ञान के चमत्कार – वरदान या अभिशाप?

रूपरेखा – 1. प्रस्तावना, 2. विज्ञान की देन, 3. हानियाँ, 4. उपसंहार ।

प्रस्तावना:

इंसान एक बुद्धिमान प्राणी है। वह अपने दिमाग की ताकत से मुश्किल काम को भी आसान और नामुमकिन को भी मुमकिन बना देता है। आज का समय सोच-विचार और विज्ञान (साइंस) का है। हर दिन नए-नए आविष्कार (खोजें) हो रहे हैं। इंसान ने अपनी बुद्धि के दम पर प्रकृति (कुदरत) को अपने वश में कर लिया है। जिन चीजों के बारे में हम कुछ समय पहले सोच भी नहीं सकते थे, आज वे सब हमारे सामने हैं। विज्ञान के इन नए और हैरान करने वाले चमत्कारों को देखकर बड़े-बड़े विचारकों का दिमाग भी चकित रह जाता है। विज्ञान के इन चमत्कारों के बारे में इंसान ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।

विज्ञान की देन: विज्ञान ने हमें जो नई ताकतें और साधन दिए हैं, वे इस प्रकार हैं:

(i) बिजली की ताकत (विद्युत-शक्ति):

विज्ञान की सभी खोजों की असली जड़ बिजली ही है। बस एक बटन दबाते ही पूरा कमरा रोशनी से भर जाता है। गर्मी से बचने के लिए पंखे और सर्दी से बचने के लिए हीटर का इस्तेमाल बहुत बड़ी सुविधा है। रेडियो, टेलीफोन, सिनेमा और टेलीविजन जैसी सभी चीजें बिजली की ताकत से ही चलती हैं। बड़ी-बड़ी मिलें, फैक्ट्रियां और गाड़ियां भी बिजली से ही चलाई जाती हैं। सच कहें तो बिजली हमारे लिए किसी भगवान के वरदान जैसी साबित हो रही है।

(ii) समाचार और मनोरंजन के साधन:

बिना तार की तकनीक (जैसे मोबाइल और इंटरनेट) बहुत ही हैरान करने वाली खोज है। बिना किसी तार के हम हजारों मील दूर बैठे अपने दोस्तों से बात कर सकते हैं। घर बैठे-बैठे ही दुनिया भर की खबरें रेडियो और टीवी के जरिए सुन सकते हैं। टेलीविजन (टीवी) पर हम बोलने वाले लोगों या नाटक करने वालों को सामने देख भी सकते हैं। आज एक मिनट के अंदर कोई भी खबर पूरी दुनिया में फैलाई जा सकती है। छोटा सा रेडियो या मोबाइल जेब में रखकर कहीं भी काम करते हुए सुना जा सकता है। टेलीफोन तो एक जादुई चीज बन गया है। बस नंबर डायल कीजिए और तुरंत दूर देश में बैठे अपने किसी रिश्तेदार या दोस्त से बात कर लीजिए।

(iii) परमाणु ताकत (परमाणु शक्ति):

बहुत ज्यादा ताकत से भरे एटम बम (अणुबम) और हाइड्रोजन बम (उद्जन बम) विज्ञान की ही खोज हैं। परमाणु बम इतना ताकतवर होता है कि अगर उसका एक चने के दाने जितना हिस्सा किसी गाड़ी में लगा दिया जाए, तो वह गाड़ी सैकड़ों सालों तक चलती रहेगी। एक छोटे से परमाणु बम ने जापान के नागासाकी और हिरोशिमा जैसे बड़े शहरों को पल भर में तबाह कर दिया था। अब तो ऐसी मिसाइलों (प्रक्षेपास्त्रों) की खोज हो चुकी है, जिनसे अपने घर बैठे-बैठे ही हजारों मील दूर दुश्मन पर हमला किया जा सकता है। अगर इस परमाणु ताकत का इस्तेमाल इंसान की भलाई के लिए किया जाए, तो यह बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है।

(iv) अन्य आविष्कार:

तेज रफ्तार वाले रॉकेटों की मदद से इंसान के कदम चांद पर भी पहुंच चुके हैं। आज के विज्ञान से इंसान का जेंडर बदलना (स्त्री को पुरुष और पुरुष को स्त्री बनाना) भी मुमकिन हो गया है। इंसान अब नकली दिमाग (कंप्यूटर या AI) बनाने की ओर बढ़ रहा है। ये सब विज्ञान के ऐसे हैरान करने वाले चमत्कार हैं, जिनके बारे में हम पहले सोच भी नहीं सकते थे। विज्ञान ने इंसान को स्वर्ग जैसा सुख, बहुत सारा पैसा और कई दुर्लभ साधन दिए हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि विज्ञान इंसान के लिए एक बहुत बड़ा वरदान है। यहाँ तक कि खेती (कृषि) के क्षेत्र में भी विज्ञान ने बहुत बड़ी सफलता दिलाई है। हमारे किसान खेती की नई मशीनों, अच्छी खाद और कीटनाशक दवाइयों का फायदा उठा रहे हैं। आज की ऑर्गेनिक खेती (जैविक कृषि) भी हमारे लिए विज्ञान का ही एक तोहफा है।

हानियाँ (नुकसान):

विज्ञान ने इंसान को कामचोर (अकर्मण्य) बना दिया है। वह आलसी और ऐश-आराम का आदी हो गया है। पूरी दुनिया में डर, शक और लड़ाई-झगड़े का माहौल बना हुआ है। विज्ञान की जो खोजें इंसानियत के लिए वरदान बन सकती थीं, वे आज एक श्राप (अभिशाप) बनी हुई हैं। आज ऐसे-ऐसे खतरनाक बम बन चुके हैं कि अगर उनका इस्तेमाल किया जाए, तो पूरी दुनिया एक पल में खत्म हो सकती है।

उपसंहार (निष्कर्ष):

विज्ञान का यह रूप पूरी मानव जाति के लिए एक श्राप बन गया है। हथियारों के दम पर दुनिया में कभी भी शांति नहीं लाई जा सकती। आज यह एक बड़ा सोचने वाला विषय बन गया है कि विज्ञान हमारे लिए नुकसानदेह है या फायदेमंद। अंग्रेजी के मशहूर कवि शेक्सपियर ने कहा है—”कोई भी चीज अपने आप में अच्छी या बुरी नहीं होती, इंसान अपनी सोच से उसे अच्छा या बुरा बना देता है।” बिल्कुल यही बात आज विज्ञान पर भी लागू होती है।